History of Bagpat
History of Bagpat: बागपत ज़िला उत्तर प्रदेश राज्य के पश्चिमी भाग में स्थित एक ऐतिहासिक और कृषि प्रधान ज़िला है। यह जिला 1997 में मेरठ जिले से अलग होकर अस्तित्व में आया। बागपत का ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व है। बागपत के इतिहास की पूरी जानकारी दी जा रही है:
बागपत ज़िले का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
प्राचीन काल: (Anciant History)
- बागपत का प्राचीन नाम व्याघ्रप्रस्थ था, जिसका अर्थ होता है “शेरों का स्थान”। यह नाम महाभारत काल से जुड़ा हुआ माना जाता है।
- ऐसा विश्वास है कि महाभारत के समय में पांचाल प्रदेश के अंतर्गत यह क्षेत्र आता था। यह क्षेत्र पांडवों और कौरवों की कथाओं से जुड़ा हुआ है। ऐसी मान्यता है कि पांडवों ने यहां अज्ञातवास किया था और दुर्योधन से बचने के लिए यहां छिपकर रह रहे थे |
- कुछ ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार यह स्थान इंद्रप्रस्थ के नजदीक एक उपनगर के रूप में विकसित था।
मध्यकाल: (Medieval History)
- इस क्षेत्र में मुग़ल और दिल्ली सल्तनत के समय कई छोटे युद्ध और प्रशासनिक गतिविधियाँ हुईं। बागपत का नाम मुगल काल में ही बागपत पड़ा था |
- इसका भूगोलिक महत्व इसके गंगा-यमुना दोआब में स्थित होने के कारण रहा है।
ब्रिटिश काल: (British Period)
- ब्रिटिश शासन के दौरान बागपत मेरठ ज़िले का हिस्सा था।
- 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में मेरठ और इसके आसपास के क्षेत्रों की तरह बागपत ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।
बागपत नाम कैसे पड़ा?
- व्याघ्रप्रस्थ नाम कालांतर में बदलकर बागपत हो गया।
- एक मान्यता यह भी है कि यहां पहले बागों की अधिकता थी, और “पत” का अर्थ स्थान होता है, इसलिए “बागपत” का अर्थ हुआ “बागों का स्थान”।
बागपत का आधुनिक इतिहास:
- 28 सितंबर 1997 को बागपत को मेरठ से अलग कर एक स्वतंत्र ज़िले का दर्जा दिया गया।
- यह जिला राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में शामिल है और दिल्ली से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
History of Bagpat का Famous Historical and Religious Place
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में कई प्रमुख धार्मिक स्थल और मंदिर हैं जो स्थानीय आस्था और सांस्कृतिक धरोहर के केंद्र हैं। नीचे कुछ महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों की सूची दी गई है:
बाल्मीकि आश्रम (बाल्मीकि तीर्थ)

- यह स्थान माना जाता है कि महर्षि वाल्मीकि का आश्रम यहीं स्थित था।
- यहाँ लव-कुश के जन्म और शिक्षा की कथाएँ प्रचलित हैं।
- तीर्थस्थल का धार्मिक महत्व रामायण काल से जुड़ा हुआ है।
कुटी मंदिर (रमाला)
- यह मंदिर बागपत के रमाला गाँव में स्थित है।
- यहाँ हर साल मेला लगता है और श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन के लिए आते हैं।
शिव मंदिर (छछरौली)

- पुराना और पवित्र शिव मंदिर, विशेष रूप से महाशिवरात्रि पर भक्तों की भीड़ लगती है।
- ग्रामीण इलाकों में इस मंदिर की गहरी मान्यता है।
श्री परशुराम मंदिर (गुंछी गाँव)
- यह मंदिर भगवान परशुराम को समर्पित है।
- क्षेत्र के ब्राह्मण समाज में इसका विशेष धार्मिक महत्व है।
हनुमान मंदिर (खेकड़ा)
- बागपत के खेकड़ा कस्बे में स्थित यह मंदिर बजरंग बली को समर्पित है।
- मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़ होती है।
जटवाड़ा मंदिर (बड़ौत)
यह मंदिर बड़ौत कस्बे में स्थित है और स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है।
बड़ौत
एक प्रमुख नगर, जहां से कई पुरातात्विक वस्तुएं मिली हैं।
काठा गांव
माना जाता है कि यह महाभारत काल का एक पुरातन स्थल है।
रिंठी महादेव मंदिर
धार्मिक दृष्टि से प्रसिद्ध स्थल है।
Famous Industries and Agriculture
उत्तर प्रदेश के बागपत ज़िले के प्रमुख उद्योग-धंधे और कृषि के बारे में आपको बताते है जो इस प्रकार है:
कृषि (Agriculture
- गन्ना (Sugarcane): बागपत गन्ने की खेती के लिए प्रसिद्ध है। यह ज़िले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
- गेहूं (Wheat): रबी फसलों में गेहूं प्रमुख है।
- धान (Rice): खरीफ सीजन में धान की खेती भी होती है।
- बाजरा, मक्का और जौ: अन्य महत्वपूर्ण फसलें।
- फल और सब्जियाँ: कुछ हिस्सों में आलू, टमाटर, प्याज और मौसमी फल भी उगाए जाते हैं।
प्रमुख उद्योग-धंधे (Industries and Trades)
चूंकि यहाँ गन्ने की खेती व्यापक रूप से होती है, इसलिए बागपत में कई चीनी मिलें हैं, जैसे:-
- रमाला चीनी मिल
- बड़ौत शुगर मिल
- गुड़ और खांडसारी उद्योग: परंपरागत रूप से गुड़ बनाने की इकाइयाँ भी बागपत में प्रचलित हैं।
- ईंट भट्टे (Brick Kilns): निर्माण क्षेत्र में उपयोग होने वाली ईंटों के कई भट्टे यहाँ कार्यरत हैं।
- दूध डेयरी उद्योग: बागपत में डेयरी व्यवसाय भी फल-फूल रहा है, खासकर सहकारी डेयरियों के ज़रिए।
- लकड़ी और फर्नीचर उद्योग: कुछ क्षेत्रों में लकड़ी का काम और फर्नीचर निर्माण भी होता है।
- हस्तशिल्प और लघु उद्योग: ग्रामीण इलाकों में कुटीर उद्योग जैसे हथकरघा, बुनाई और कढ़ाई कार्य भी होते हैं।
खान – पान (Food)
बिलकुल, बागपत ज़िले का खानपान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और कृषि परंपराओं का सुंदर मिश्रण है। यहाँ का भोजन स्वादिष्ट, पौष्टिक और पारंपरिक होता है। चलिए विस्तार से जानते हैं बागपत के खानपान के बारे में:
मुख्य अनाज और दैनिक भोजन
बागपत एक कृषि प्रधान क्षेत्र है, इसलिए यहाँ के लोगों का खानपान भी खेती से जुड़ा हुआ है।
- गेहूं और बाजरा: रोटियों में आमतौर पर गेहूं का प्रयोग होता है, जबकि सर्दियों में बाजरे की रोटी भी खाई जाती है।
- चावल: विशेष अवसरों या दोपहर के भोजन में चावल भी खाया जाता है, खासकर अरहर की दाल या कढ़ी के साथ।
दालें और सब्जियाँ
- अरहर, चना, मसूर और मूंग की दालें आमतौर पर बनती हैं।
- मौसमी सब्जियाँ जैसे तोरी, लौकी, टिंडा, भिंडी, आलू, बैंगन, पालक और सरसों का साग बहुत लोकप्रिय हैं।
विशिष्ट पारंपरिक व्यंजन
- कढ़ी-चावल: यह एक लोकप्रिय भोजन है, विशेषकर रविवार या त्योहारों पर।
- चना-चूरा: भूने हुए चने और चिउड़ा का मिश्रण, हल्की फुल्की भूख के लिए।
- सत्तू: गर्मियों में सत्तू का शरबत बहुत पसंद किया जाता है, जो शरीर को ठंडक देता है।
- तहरी: सब्जियों और चावल का मसालेदार मिश्रण, कभी-कभी आलू और गोभी के साथ बनाई जाती है।
मिठाइयाँ और स्नैक्स
- गुड़ और तिल के लड्डू: सर्दियों में बहुत लोकप्रिय।
- खीर, सेवई, हलवा: त्योहारों और खास मौकों पर बनते हैं।
- गुड़ की रोटी और घी: पारंपरिक मिठास के लिए।
दूध और उससे बने उत्पाद
बागपत में डेयरी का चलन बहुत है, इसलिए दूध, दही, मठ्ठा और घी यहाँ के भोजन में विशेष स्थान रखते हैं।
- छाछ (मठ्ठा) गर्मियों में नियमित पिया जाता है।
- घर का बना घी और मक्खन अक्सर रोटी और पराठे के साथ खाया जाता है।
ग्रामीण विशेषताएँ
गाँवों में खाना आज भी मिट्टी के चूल्हों पर बनाया जाता है, जिससे खाने में एक अलग मिट्टी की सौंधी खुशबू और स्वाद आता है। वहाँ लोग आमतौर पर शुद्ध देसी घी और सरसों के तेल का इस्तेमाल करते हैं।
जनसांख्यिकी (Demography)
बागपत ज़िला, उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भाग में स्थित है और यहाँ की जनसंख्या, जनसंख्या घनत्व, लिंगानुपात, साक्षरता दर और पंचायत व्यवस्था के बारे में निम्नलिखित जानकारी उपलब्ध है:
Population जनसंख्या (2011 जनगणना के अनुसार)
- कुल जनसंख्या: बागपत जिले की कुल जनसंख्या 13 लाख 3048 है।
- पुरुष: पुरुष की जनसंख्या लगभग 7:30 लाख है।
- महिला: महिलाओं की जनसंख्या लगभग 6 लाख 30 हज़ार 45 है।
जनसंख्या घनत्व
Population density की बात करें तो यह 986 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर जनसंख्या घनत्व है|
लिंगानुपात
1000 पुरुष पर 861 महिलाये हैं।
साक्षरता दर
- कुल साक्षरता दर: बागपत की कुल साक्षरता दर 70.5 % है।
- पुरुष: 72.05%
- महिला: 58.93%
College, University and Educational Institute
बागपत जिले में कई प्रतिष्ठित कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान हैं जो विभिन्न विषयों में उच्च शिक्षा प्रदान करते हैं। यहां कुछ प्रमुख संस्थानों की जानकारी दी गई है।
- जनता वैदिक कॉलेज, बड़ौत
- बागपत ग्लोबल कॉलेज
- बागपत इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड टेक्नोलॉजी (BIET)
- परमाउंट इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड टेक्नोलॉजी
- गायत्री देवी कॉलेज ऑफ एजुकेशन
- फूलवती इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ
- यूनिवर्सल कॉलेज ऑफ एजुकेशन
अन्य प्रमुख संस्थान
- आर्यभट्ट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, दुला
- इंडो यूनिवर्सल कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, बारौत
- इंद्रदेव गर्ल्स इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड टेक्नोलॉजी, बागपत
- तेजस इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग, बागपत
- योगिनाथ डिग्री कॉलेज, बागपत
History of Bagpat: इस तरह बागपत जिले का इतिहास काफी पुराना और ऐतिहासिक है और महाभारत काल से भी इस जिले का नाम जुड़ा है। वर्तमान मैया जिला उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण जिला है और लगातार विकास के पथ पर अग्रशील है।


